Life Style Natural
गुरुवार, 12 सितंबर 2024
ये सुन पगली
गुरुवार, 5 सितंबर 2024
माता पिता प्रथम गुरु को प्रणाम
बुधवार, 4 सितंबर 2024
भांजियां खा ल आबे टूरी रे हमर होटल म
मंगलवार, 3 सितंबर 2024
छत्तीसगढ़ माटी की गूंज
छत्तीसगढ़ी माटी की गूँज
Verse 1:
छत्तीसगढ़ के माटी में बसे हैं सपने,
यहां के हर कदम पे मिलते हैं अपने,
धरती पे जैसे अमरित की धारा,
यहां के गीतों में बसी है सादगी की कारा।
Chorus:
ओ छत्तीसगढ़ी माटी, तेरा रंग निराला,
तेरी खुशबू में है सारा जहां पाला,
हर दिल में बसती है तेरी कहानी,
तू है हमारे दिल की रानी।
Verse 2:
नदियों का पानी मीठा सा लगता,
धान के खेतों में गीत है सजता,
तेंदू पत्ता, महुआ के बागान,
छत्तीसगढ़ की यही है पहचान।
Chorus:
ओ छत्तीसगढ़ी माटी, तेरा रंग निराला,
तेरी खुशबू में है सारा जहां पाला,
हर दिल में बसती है तेरी कहानी,
तू है हमारे दिल की रानी।
Bridge:
यहां के त्योहार, यहां की रीत,
हर पल में दिखती है अपनेपन की जीत,
नाचा, पंथी, सुआ की थाप,
छत्तीसगढ़ी संस्कृति का अमिट है ताप।
Chorus:
ओ छत्तीसगढ़ी माटी, तेरा रंग निराला,
तेरी खुशबू में है सारा जहां पाला,
हर दिल में बसती है तेरी कहानी,
तू है हमारे दिल की रानी।
Outro:
तेरी धरती का रस, तेरी हवा का प्यार,
छत्तीसगढ़ी माटी, तू है सबसे प्यारा उपहार,
सपनों का संसार, यहां का हर घर,
छत्तीसगढ़ की माटी, तुझमें बसा है हमारा घर।
रविवार, 1 सितंबर 2024
चल चल धारा बहाए
चल चल धारा बहाए, चलो रे साथी,
सपनों की ये नगरी, अब हमें बुलाए।
राहें हैं नई-नई, मंज़िलों की ओर,
हर कदम पर रंगों की, है छाँव-धूप घोर।
सपनों के परों में, उड़ान है बसा,
चल चल धारा बहाए, वक्त न गवाँ।
चल चल धारा बहाए, चलो रे साथी,
सपनों की ये नगरी, अब हमें बुलाए।
हर पल है सुनहरा, हर सपना जवाँ,
प्यासे दिलों की मिट जाए प्यास यहाँ।
पर्वतों के पार से, आयी है ये पुकार,
चलते जाओ राही, न हो रुकावटें हजार।
चल चल धारा बहाए, चलो रे साथी,
सपनों की ये नगरी, अब हमें बुलाए।
लहरों के संग-संग, बहते जाएं हम,
मन की बातों को, सब कह जाएं हम।
इस सफ़र में साथ चल, न पीछे मुड़ना,
चलते रहना साथी, मंज़िल से मिलना।
चल चल धारा बहाए, चलो रे साथी,
सपनों की ये नगरी, अब हमें बुलाए।



