चल चल धारा बहाए, चलो रे साथी,
सपनों की ये नगरी, अब हमें बुलाए।
राहें हैं नई-नई, मंज़िलों की ओर,
हर कदम पर रंगों की, है छाँव-धूप घोर।
सपनों के परों में, उड़ान है बसा,
चल चल धारा बहाए, वक्त न गवाँ।
चल चल धारा बहाए, चलो रे साथी,
सपनों की ये नगरी, अब हमें बुलाए।
हर पल है सुनहरा, हर सपना जवाँ,
प्यासे दिलों की मिट जाए प्यास यहाँ।
पर्वतों के पार से, आयी है ये पुकार,
चलते जाओ राही, न हो रुकावटें हजार।
चल चल धारा बहाए, चलो रे साथी,
सपनों की ये नगरी, अब हमें बुलाए।
लहरों के संग-संग, बहते जाएं हम,
मन की बातों को, सब कह जाएं हम।
इस सफ़र में साथ चल, न पीछे मुड़ना,
चलते रहना साथी, मंज़िल से मिलना।
चल चल धारा बहाए, चलो रे साथी,
सपनों की ये नगरी, अब हमें बुलाए।

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