मंगलवार, 3 सितंबर 2024

छत्तीसगढ़ माटी की गूंज

 छत्तीसगढ़ी माटी की गूँज


Verse 1: छत्तीसगढ़ के माटी में बसे हैं सपने,
यहां के हर कदम पे मिलते हैं अपने,
धरती पे जैसे अमरित की धारा,
यहां के गीतों में बसी है सादगी की कारा।

Chorus: ओ छत्तीसगढ़ी माटी, तेरा रंग निराला,
तेरी खुशबू में है सारा जहां पाला,
हर दिल में बसती है तेरी कहानी,
तू है हमारे दिल की रानी।

Verse 2: नदियों का पानी मीठा सा लगता,
धान के खेतों में गीत है सजता,
तेंदू पत्ता, महुआ के बागान,
छत्तीसगढ़ की यही है पहचान।

Chorus: ओ छत्तीसगढ़ी माटी, तेरा रंग निराला,
तेरी खुशबू में है सारा जहां पाला,
हर दिल में बसती है तेरी कहानी,
तू है हमारे दिल की रानी।

Bridge: यहां के त्योहार, यहां की रीत,
हर पल में दिखती है अपनेपन की जीत,
नाचा, पंथी, सुआ की थाप,
छत्तीसगढ़ी संस्कृति का अमिट है ताप।

Chorus: ओ छत्तीसगढ़ी माटी, तेरा रंग निराला,
तेरी खुशबू में है सारा जहां पाला,
हर दिल में बसती है तेरी कहानी,
तू है हमारे दिल की रानी।

Outro: तेरी धरती का रस, तेरी हवा का प्यार,
छत्तीसगढ़ी माटी, तू है सबसे प्यारा उपहार,
सपनों का संसार, यहां का हर घर,
छत्तीसगढ़ की माटी, तुझमें बसा है हमारा घर।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें