शनिवार, 23 मार्च 2024

''आया रे होली आओ खेलें होली'' कविता

""आया रे होली आओ खेलें होली चलो संगी होली खेलें, रंग बिरंगी होली खेलें आया रे होली आओ खेलें होली।"" रंग गुलाल लिये घर से निकली मतवाली टोली रे, ढोल की थाप पे पाँव उठे औ गूँज उठी फिर होली रे
आया रे होली आओ खेलें होली चलो संगी होली खेलें, रंग बिरंगी होली खेलें। जले न भक्त प्रहलाद जल गई होलिका खुदा रसीदह से पाया न पार होली में। अंगना में कई हौज बनवाये, भांति-भांति के रंग घुलाये. पिचकारी भर धूम मचाएं, गली गली में धूम मचाएं। आया रे होली आओ खेलें होली, चलो संगी होली खेलें, रंग बिरंगी होली खेलें।
पिलाओ भांग उनको, फिर नचाओ भांगडा जी भर के। बच्चों के साथ रंग बिरंगे पिचकारी खेलें, पिचकारी के बौछारों से चारो ओर छाई, उमंग खुशियों के सागर में डूबी दुनिया में फैली प्रेम तरंगें। आया रे होली, आओ खेलें होली। चलो संगी होली खेलें, रंग बिरंगी होली खेलें। आया रे होली, आओ खेलें होली।
जय जौहर जय छत्तीसगढ़ जय भारत आपको और आपके परिवारों को होली की हार्दिक हार्दिक शुभकामनाएं शुभकामनाएं 🙏🙏🙏

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